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..तो जिंदगी में कुछ भी हो सकता है


क्या किसी की असफलताएं उसकी जिंदगी को बदल सकती है? क्या आप ऐसे इंसान से मिले हैं जो अपनी असफलताओं पर मुस्करा सकता है? ऐसा देखने में तो कम होता है पर ॥जिंदगी में कुछ भी हो सकता है, अच्छा खासा सफल आदमी कभी असफल हो सकता है.. और कभी कभी ऐसे संघर्ष भी आपको देखने को मिलेंगे जो इंसान की जिंदगी को फर्श से अर्श पर ले जाती है क्योंकि जिंदगी में कुछ भी हो सकता है दोस्त।
दरअसल जंदगी में कुछ भी हो सकता है ख्यात अभिनेता अनुपम खेर की जिंदगी की उस सच्चई से रूबरू कराता है जिसमें एक ऐसे इंसान का सफरनामा है जो अपने पैदा होते ही चर्चा में आ चुका था, वे अपने जन्म के समय इतने सुंदर थे और उनके जन्म के नर्स ने अनुपम की मां से कहा था कि क्या आप अपने बेटे को गोद देना पंसद करेगी।और मां ने बस इतना कहा था मेरा बिट्टू॥।



मां का लाडला बिट्टू बड़ा होकर शिमला की सड़कों पर घुमते हुए सोचता था कि जिंदगी में कुछ भी हो सकता है और यहीं वह बात थी जो किशोर अनुपम खेर के कलाकार मन को एनएसडी ले गई ।




एनएसडी से पास होने के बाद अनुपम ने कुछ सालों तक संघर्ष किया और महेश भट्ट की फिल्म सारांश ने उनकी जिंदगो को एक ऐसा मोड़ दिया जिसने उनको बॉलीवुड में एक कलाकार के रूप में स्थापित कर दिया।


बॉलीवुड में फिल्मों का सफर चल पड़ा और कभी खलनायक, सहायक अभिनेता और बेहतरीन कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं में अनुपम ने एक ऐसा दौर देखा की उनके बारे में कहा जाने लगा कि बॉलीवुड की फिल्में अनुपम खेर के बिना अधूरी है। दरअसल अनुपम एक ड्रीमर की तरह है और अपने सफलतम दौर में खेर ने मीडिया टायकून बनने का सपना देखा और अपना पहला प्रोडक्शन हाउस खोला जिसकी पहली फिल्म ओम जय जगदीश हरे थी लेकिन फिल्म सफल नहीं हो सकी और यहीं वह दौर था जब खेर को नई फिल्में मिलना भी लगभग बंद हो गई थी। एक कलाकार के रूप में खेर की जिंदगी में यह एक मुश्किल दौर था और इसी मुश्किल दौर में खेर ने अपनी असफलताओं को जोड़कर फनी अंदाज में ..कुछ भी हो सकता है को बुना और अब तक वे 2०० से अधिक शो कर चुके है..आज भोपाल में वे जनता से इस प्ले के माध्यम से रूबरू होंगे..
राजेश यादव

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