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ऑस्कर की दौड़ से पीपली लाइव बाहर हुई


भारत की तरफ से नामांकित की गई पीपली लाइव अंतिम 15में स्थान नहीं बना पाई है। पीपली लाइव के बाहर होने से एक बार फिर ऑस्कर जीतने का भारत सपना टूट गया है।

फिल्म की समीक्षा पढ़ने के लिए क्लिक करें: ऑस्कर की दौड़ से पीपली लाइव बाहर हुई

आखिर हमारी फिल्में आस्कर क्यों नहीं जीत पाती है? क्या हमारे यहां से सही फिल्मों का चुनाव नहीं होता ? क्या फिल्म भेजने की पूरी प्रक्रिया को बदला जाना चाहिए? या फिर आपको लगता है कि अभी बॉलीवुड फिल्म निमार्ण और कहानी की सोच के मामले में वि व स्तर के मापदंडो से बहुत पीछे है? आखिर वह कौन सी बात है जिसके कारण हमारी फिल्मों को ऑस्कर नहीं मिल पाता?

टिप्पणियां

meri soch is mamle mein thodi alag hai, aakhir hum log oscar ko itna mahtav hi kyun dete hai, jo award hamari filmon ke liye banaa hi nahi hai, hum kewal foreign language movies ke liye adhikrit hain, fir bhi hum iske liye paglaye rahgte hain, iski bajay hum apne desh se judi mahtvapurn filmo aur award par dhyan kendrit karen to behtar hoga.

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पहले वह एक दयालु किसान था लेकिन कुछ बातों ने उसे औरों से अलग बनाती थी। जैसे.

1949 : उसने सेना को ज्वॉइन किया

1958 में उसने 3000 मीटर में स्टेपलचेस का नया नेशनल रिकार्ड बनाया।

1958 से1964 तक लगातार सात साल वह नेशनल चैंपियन बना।

लेकिन एक दिन वह सिस्टम से ऐसा नाराज हुआ की  बागी  बन गया। चंबल के इस भागी पान सिंह तोमर की कहानी को बॉक्स ऑफिस पर तिग्मांशु धूलिया लेकर आ रहे हैं। फिल्म का एक चर्चित संवाद आजकल चर्चा में हैं.

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जिंदगी की किताब की विशेष न्यूज। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन, थॉमस स्टेट्जि और इजरायल की यदा योनेथ को संयुक्त रुप से रसानयन के श्रेत्र में की गई खोज राइबोसोम की संरचना के अध्ययन और खोज के लिए २००९ का नोबल प्राइज देने का ऐलान किया है।
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