सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

‘द एज ऑफ वंडर ’ ने पापुलर लेखन का खिताब जीता


पापुलर लेखन के लिए रॉयल सोसायटी अवार्ड २क्क्९ के लिए ‘द एज ऑफ वंडर ’नाम की किताब को दिया गया है। इस किताब के लेखक रिचर्ड होल्मस है और अवार्ड के रुवरुप उनकों १क्,क्क्क् यूरो डॉलर का चेक दिया जाएगा।



अवार्ड कमेटी के जज चैयरमेन, केमिस्ट और नोबल अवार्ड विजेता सर टिम हंट ने इस किताब के बारें में कहा है कि द एज ऑफ वंडर एक ऐसी किताब है जो नायकों की कहानी कहती है।



रिचर्ड होल्मस यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजिला के बायोग्राफिकल स्टडी विभाग में प्रोफेसर है। उनकी किताब डिंगल अवार्ड के लिए भी शार्ट लिस्ट हुई है।



रॉयल सोसायटी अवार्ड यूके में बहुत सम्मान के साथ देखा जाता है और प्रकाशन जगत में इस अवार्ड को लेकर बहुत उत्सुकता रहती है।



रॉयल सोसायटी अवार्ड 2009के लिए जिन किताबों के बीच मुकाबला था:



* ‘द एज ऑफ वंडर ’ : रिचर्ड होल्मस


* ‘वॉट द नोज क्नोव’ : एवरी गिलबर्ट


* ‘बेड सांइस’ : बेन गोल्डकेयर


* ‘डिकोडिंग द हैवंस’ : विलियम हैनिमन


* ‘द ड्रंककार्ड वाल्क’ :लियोनार्ड म्लोडिनोव


* योअर इनर फिश : नील सुबिन





टिप्पणियां

जानकारी के लिए धन्‍यवाद !!

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बीहड़ में बागी होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में : पानसिंह तोमर

बीहड़ में बागी  होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में : पानसिंह तोमर


पहले वह एक दयालु किसान था लेकिन कुछ बातों ने उसे औरों से अलग बनाती थी। जैसे.

1949 : उसने सेना को ज्वॉइन किया

1958 में उसने 3000 मीटर में स्टेपलचेस का नया नेशनल रिकार्ड बनाया।

1958 से1964 तक लगातार सात साल वह नेशनल चैंपियन बना।

लेकिन एक दिन वह सिस्टम से ऐसा नाराज हुआ की  बागी  बन गया। चंबल के इस भागी पान सिंह तोमर की कहानी को बॉक्स ऑफिस पर तिग्मांशु धूलिया लेकर आ रहे हैं। फिल्म का एक चर्चित संवाद आजकल चर्चा में हैं.

सवाल : आप डाकू क्यों बनें?

पानसिहं तोमर का जवाब:  बीहड़ में बागी  होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में

फिल्म में पान सिंह तोमर की भूमिका में बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता इरफान खान नजर आएगें। फिल्म का पहला टीजर 7  फरवरी को रिलीज हुआ है।

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन को नोबल

जिंदगी की किताब की विशेष न्यूज। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन, थॉमस स्टेट्जि और इजरायल की यदा योनेथ को संयुक्त रुप से रसानयन के श्रेत्र में की गई खोज राइबोसोम की संरचना के अध्ययन और खोज के लिए २००९ का नोबल प्राइज देने का ऐलान किया है।
द रॉयल स्वीडिस एकेडमी ऑफ साइंस ने कहा है कि राइबोसोम डीएनए कोड को जीवन के रुप में स्थानांनतरण करते है।
वेंकटरमण रामाकृष्णनन (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक)
जन्म : १९५२ में भारती राज्य तमिलनाडू के चिदंबरम शिक्षा : ओहियो विश्वविद्यालय से 1९७६ में पीएचडी क्या है यह खास खोज : इन तिनो वैज्ञानिकों ने आणविक स्तर पर जैव कोशिका में राइबोसोम की संरचना और कार्यप्रणाली का पता लगाया है। यह कोशिका की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है, इसी खोज के लिए निर्णायक मंडल ने इन वैज्ञानिकों ने तीनों वैज्ञानिकों को रसायन शास्त्र का यह नोबल प्राइज दिया है।राइबोसोम प्रोटीन पैदा करता है जो बदले में जीवति अंगो के रासायनिक तंत्र को नियंत्रित करने में अपनी भूमिका निभाता है।