सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Rajesh Khanna Birthday special :राजेश खन्ना ने हमें रोमांस का क्रेश कोर्स सिखाया




ब्लॉग पोस्ट  Rajesh Khanna Birthday special 


29 दिसम्बर का दिन बॉलीवुड के लिए कुछ स्पेशल दिन है और हो भी क्यों ना आखिर बॉलीवुड के पहले ओरिजनल सुपरस्टार राजेश खन्ना का जन्म दिन आज ही के  दिन हुआ था। 1969 से 1971 के तीन जबरदस्त साल बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की फिल्मों की सफलता की ऐसी दास्तान है जिसको देखकर सिनेमा जगत है ने 1971 में राजेश खन्ना को बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार का दर्जा दिया।  रोमांस को परदे पर जिस अंदाज़ में उन्होंने जिया वह अपने आप में उनकी फिल्मों की सफलता को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है, आराधना , आन मिलो सजना और अमर प्रेम जैसी फिल्मों की सफलता इस बात की गवाह है।  कहा जाता है की उस समय उनकी स्टाइल का जादू ऐसा था की उनके फैंस उनकी तरह ही गुरु कुर्ता बनवाना पसंद करते थे। 18 जुलाई 2012 को बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार  राजेश राजेश खन्ना के निधन पर अनुपम खेर ने कहा राजेश खन्ना ने हमें रोमांस का क्रेश कोर्स सिखाया है।  उन्होंने हमारी आँखों को एक ऐसे ट्विंकल से परिचित कराया है जो हमें हमेशा अपने आप के लिए बेहतर सोचने के लिए प्रेरित करता है। 

गौरतालाब है की हिन्दी फिल्म जगत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना का 18 जुलाई 2012 को  मुंबई में निधन हो गया था । उनके अंतिम समय में उनकी पत्नी डिपंल, दोनों बेटियां और दामाद अक्षय कुमार सहित पूरा परिवार मौजूद था। उनके निधन से बॉलीवुड सहित करोड़ों सिनेमा प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई थी और उनके फैंस मुंबई की बरसात में भी अपने पहले सुपर स्टार की एक झलक देखने के लिए उमड़ पड़े थे  । बेस्ट रोमांटिक हीरो

 24 साल की उम्र में बॉलीवुड में प्रवेश
24 साल के उस लड़के को उसकी किस्मत मुंबई लाई थी, फिर रोमांस का एक जादू चला और जो कभी जतिन था राजेश खन्ना के नाम से बॉलीवुड में छा गया। आखिरी खत से फिल्मी जीवन शुरु हुआ और कुछ सालों में ही राजेश के अभिनय और रूमानी अंदाज ने उनकों ऐसा कलाकार बना दिया जिसकी जिसके आगे स्टॉर शब्द भी छोटा लगने लगा और इस तरह से बॉलीवुड को उसका पहला सुपर स्टॉर मिल गया। दरअसल राजेश के बचपन का नाम जतिन था और एक टैलंट शो का विजेता बनने के बाद उनकों बॉलीवुड में अपनी किस्मत अजमानें का मौका मिला था।

29 दिसबंर 1942 को जन्में राजेश खन्ना ने मात्र  24 साल की उम्र में बॉलीवुड में प्रवेश किया था। सिलसिला आखिरी खत से शुरु हुआ और राज, बहारों के सपने, अराधना, दो रास्ते , कटी पंतग और सफर की फिल्मों की सफलता का आलम यह था कि बॉलीवुड में उनकी एक अलग पहचान बन गई। 1969 से 1972 के बीच राजेश खन्ना ने 15 सिल्वर जुबली फिल्में देकर एक ऐसा रिकार्ड बनाया जिसे आज तक कोई छू भी नहीं पाया है। राजेश को सुपर सितारा कहा जाने लगा, कहा जाता है कि लड़कियां उनके सम्मोहन में कुछ इस कदर दिवानी थी कि खून से लिखे खत भेजती थी और उनकीं कारों को चूमने में भी उनकी प्रशंसकों को कोई झिझक नहीं होती थी।

 फिल्मी जीवन एक पहेली  की तरह
आन्नद, सच्च झूठा, अमर प्रेम जैसी फिल्मों में उनका बेहतरीन अभिनय अपने उफान पर था और अपनी संवाद अदायगी, बोलने का अलहदा अंदाज लोंगो को सबसे अलग और सबसे जुदा लगे। राजेश खन्ना का फिल्मी जीवन एक पहली की तरह है उनकों बेहद कम समय में एक ऐसी सफलता मिली जिसकी उस वक्त कोई कल्पना नहीं कर सकता था लेकिन सफलता के इस माउंट एवरेस्ट पर इस सुपर सितारे ने बहुत कम साल ही राज किया और अमिताभ बच्चन के आगाज होने के साथ ही उनका क्रेज धीरे धीरे कम होता गया। फिल्मी जीवन से अलग राजनीति में भी उन्होंने धमाकेदार प्रवेश किया था और पहले भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को कड़ी टक्कर दी और बाद में 1991 से 1996 के दौरान सांसद भी रहे।फिल्म अवतार से एक बार लगा कि काका वापसी करने जा रहे है लेकिन इस भावनात्मक फिल्म के बाद वे कोई बड़ी फिल्म नहीं दे सकें।

डिंपल की खूबसूरती पर फ़िदा हो गए  काका
प्यार की किताब रूपी जिंदगी में राजेश को अंजू महेन्द्रू से खासा लगाव था लेकिन कुछ बातों पर अनबन के चलते यह दोस्ती खत्म सी हो गई। लेकिन बॉबी फिल्म से हिट हुई डिंपल कपाड़िया के दिल पर भी काका राज करते थे और डिंपल की खूबसूरती के कायल काका ने विवाह किया। दोनों की जिंदगी में दो खूबसूरत बेटिंया भी आई। समय के साथ काका का स्टॉरडम कम होता गया और बाद में डिंपल के साथ भी रिस्तों में वह बात नहीं रही और दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद काका की जिंदगी में उनकी खास और सबसे राजदार दोस्त बनीं टीना मुनीम, लेकिन इस दोस्ती में भी ठहराव नहीं था। दरअसल राजेश खन्ना की जिंदगी में ऐसा बहुत कुछ है जिसकी कल्पना आप आदमी नहीं कर सकता शायद इसी लिए तो कभी कहा जाता था ऊपर आका नीचे काका।

RAJESH YADAV



















टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बीहड़ में बागी होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में : पानसिंह तोमर

बीहड़ में बागी  होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में : पानसिंह तोमर


पहले वह एक दयालु किसान था लेकिन कुछ बातों ने उसे औरों से अलग बनाती थी। जैसे.

1949 : उसने सेना को ज्वॉइन किया

1958 में उसने 3000 मीटर में स्टेपलचेस का नया नेशनल रिकार्ड बनाया।

1958 से1964 तक लगातार सात साल वह नेशनल चैंपियन बना।

लेकिन एक दिन वह सिस्टम से ऐसा नाराज हुआ की  बागी  बन गया। चंबल के इस भागी पान सिंह तोमर की कहानी को बॉक्स ऑफिस पर तिग्मांशु धूलिया लेकर आ रहे हैं। फिल्म का एक चर्चित संवाद आजकल चर्चा में हैं.

सवाल : आप डाकू क्यों बनें?

पानसिहं तोमर का जवाब:  बीहड़ में बागी  होते हैं , डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में

फिल्म में पान सिंह तोमर की भूमिका में बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता इरफान खान नजर आएगें। फिल्म का पहला टीजर 7  फरवरी को रिलीज हुआ है।

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन को नोबल

जिंदगी की किताब की विशेष न्यूज। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन, थॉमस स्टेट्जि और इजरायल की यदा योनेथ को संयुक्त रुप से रसानयन के श्रेत्र में की गई खोज राइबोसोम की संरचना के अध्ययन और खोज के लिए २००९ का नोबल प्राइज देने का ऐलान किया है।
द रॉयल स्वीडिस एकेडमी ऑफ साइंस ने कहा है कि राइबोसोम डीएनए कोड को जीवन के रुप में स्थानांनतरण करते है।
वेंकटरमण रामाकृष्णनन (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक)
जन्म : १९५२ में भारती राज्य तमिलनाडू के चिदंबरम शिक्षा : ओहियो विश्वविद्यालय से 1९७६ में पीएचडी क्या है यह खास खोज : इन तिनो वैज्ञानिकों ने आणविक स्तर पर जैव कोशिका में राइबोसोम की संरचना और कार्यप्रणाली का पता लगाया है। यह कोशिका की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है, इसी खोज के लिए निर्णायक मंडल ने इन वैज्ञानिकों ने तीनों वैज्ञानिकों को रसायन शास्त्र का यह नोबल प्राइज दिया है।राइबोसोम प्रोटीन पैदा करता है जो बदले में जीवति अंगो के रासायनिक तंत्र को नियंत्रित करने में अपनी भूमिका निभाता है।