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Film Review | NASHA




               फिल्‍म  : नशा
           निर्देशक : अमित सक्‍सेना  
       निर्माता : आदित्‍य भाटिया
    कलाकार : पूनम पांडे , शिवम
  जेनर : इरोटिक थ्रिलर

रेटिंग : 2  

अमित सक्‍सेना के निर्देशन में बनी फिल्‍म नशा इरोटिक थ्रिलर है जिसकी कहानी कमजोर है और ऐसा लगता है कि पूनम पांडे की बोल्‍ड इमेज को कैश कराने के लिए इस फिल्‍म को बनाया गया है । कमजोर पटकथा और बेदम संवाद के चलते जिस्‍म जैसी बोल्‍ड फिल्‍म बना चुके फिल्‍म निर्देशक अमित सक्‍सेना इस फिल्‍म में पूनम पांडे को वह छवि भी नहीं दे पाए है जिसके लिए वह जानी जाती है। फिल्‍म में दो चार बोल्‍ड और छिछोरे संवाद जरूर उपयोग किए गए है जिनके होने या ना होने से फिल्‍म को कोई बहुत ज्‍यादा  फर्क नहीं पड़ता है। पूनम पांडे का अभिनय कुछ खास नहीं है और संवाद बोलने का लहजा कमजोर है और इमोशनल सीन में भी वे कुछ विशेष नहीं कर सकी है । फिल्‍म में टीजएज जनरेशन के भटकाव को शिवम ने परदे पर अच्‍छी तरह से जिया है जिसके लिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए ।

फिल्‍म की कहानी साहिल (शिवम) नामक ऐसे छात्र की है जो डांस टीचर अनीता (पूनम पांडे) के रूप और अदा पर फिदा हो एक तरफा प्‍यार कर बैठता है। साहिल की जिंदगी में यूं तो एक गर्लफ्रेंड  पहले से है लेकिन वह अपनी डांस टीचर पर फिदा होकर उससे पाने की जिद में पड़ जाता है । इधर अनीता पहले ही किसी और को प्‍यार करती है  और इसलिए शुरु में वह साहिल को समझाती है लेकिन जब उसे अपने पहले प्‍यार से धोखा मिलता है और इधर साहिल का उसके प्रति गजब का प्‍यार तो वह न चाहते हुए भी  अपने आप को रोक नहीं पाती । लेकिन अनीता की नजरो में प्‍यार गर्मियों की उन छुटि़टयों की तरह है जो हर बार आता है एक नहीं कहानी के साथ। इन सब के बीच है कहानी का किशोरवय हीरो जो अपनी टीचर में अजीब सी कामुकता भरा क्रश रखता है। कहानी की शुरुआत  जितनी सुस्‍त और कमजोर है अंत भी कुछ वैसा ही ऐसा विशेष नहीं है।

फिल्‍म में कुछ संवाद जरूर दर्शको को ध्‍यान खींचते हैं जैसे पहली बार स्‍कूल वालो ने कोई नेक काम किया है ..ऐसी टीचर से पढ़वाओं ना, मत कर आंखे कमजोर हो जाएगीं  ओह टिप्‍सी फिर वहीं हरकत , इस स्‍वाद का राज है उसके हाथों की गंद बचपन से उसने नहाना कर दिया था बंद ।


फिल्‍म को छोटे शहरों में सिंगल थियेटर सिनेमा में दर्शक मिलेंगे  और पूनम पांडे को देखने के लिए ही दर्शक आएगा लेकिन उसे यहां कुछ नया मिलने की उम्‍मीद नहीं करनी चाहिए । पूनम पांडे को बोल्‍ड अवतार में कुछ नया देखने वालों के लिए कुछ खास नहीं है और इससे बोल्‍ड तो वे डिजिटल माघ्‍यमों में पहले से ही नजर आ रही है। हां उनकी बोल्‍ड छवि और बेबाक बातों के चलते इस फिल्‍म को दर्शक मिलेंगे । कम उम्र के लड़के और बड़ी उम्र की महिला की प्रेम कहानी की थीम पर इससे पहले भी एक छोटी सी लव स्‍टोरी जैसी फिल्‍म बन चुकी है लेकिन यहां वह बात नहीं है, बेशक यह पूनम पांडे का सिनेमा है और इस इरोटिक फिल्‍म को अगर सफलता मिलती है तो इसके लिए उनकी उस छवि को देना होगा जो उन्‍होंने अपनी बातों और बोल्‍ड  वीडियो के जरिए  सायबर स्‍पेस का उपयोग करते हुए बनाई है । सेक्‍स एक ऐसा विषय है जो गूगल पर बारहमासी लोगों की पसंद रहा है उसी तरह से पूनम पांडे की बड़े परदे पर एक खास दर्शक वर्ग के लिए नशा बनकर आएगी। अगर निर्देशक कहानी में रोचकता और बोल्‍डनेस का सही तड़का बेहतर संवाद के साथ लगाते तो कुछ और बात होती ।  फिल्‍म शिवम के अभिनय के लिए देखने की हिम्‍मत आप कर सकते हैं, पूनम पांडे की बोल्‍ड अभिनय देखने की इच्‍छा अगर आप रखते हैं तो बेहतर होगा कि आप उनकी बातें सुने और ऑनलाइन उनके वीडियो और तस्‍वीरें देख ले।


Rajesh Yadav

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