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मोना कपूर : ‘एक मां जिसकी अंतिम इच्छा रह गई अधूरी’





अर्जुन कपूर की मां मोना कपूर के निधन पर श्रद्धांजलि । 



बोनी कपूर की पहली पत्नी और फ्यूचर स्टूडियो की सीईओ मोना कपूर का मुंबई के हिन्दुजा हॉस्पीटल में निधन हो गया है, उनका कैंसर का इलाज चल रहा था।  अर्जुन कपूर   और उनकी बहन अंशुला कपूर ने अपनी मां के अंतिम समय में साथ थे और उन्होंने उनकी देखभाल की। मोना कपूर का जन्म 3 फरवरी1964 को दिल्ली में हुआ था। वे फ्यूचर स्टूडियो की सीईओ थी।

एक मां का अधूरी इच्छा

उनके पुत्र  अर्जुन कपूर  कपूर की फिल्म ‘इश्कजादे ’18 मई को रिलीज होने वाली थी और वे अपने बेटे की इस फिल्म को बड़े परदे पर देखने की इच्छुक थीं लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई, हालांकि फिल्म निर्माण के दौरान उन्होंने अपने बेटे के कुछ शूटिंग स्कैन देखे थे। अजरुन कपूर ने अपनी पहली फिल्म इश्कजादे के लिए कड़ी मेहनत की है। बेटे की पहली फिल्म को रिलीज होते हुए बड़े परदे पर देखने की स्व. मोना कपूर जी की बहुत इच्छा थी, लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी ही रह गई। उनके निधन का समाचार जिसने भी सुना बोल पड़ा काश! ऐसा न हुआ होता।

जुझारू महिला 

ट्विट्र पर अभी पिछले दिनों ही तो उन्होंने अपने बेटे  अर्जुन कपूर   की फिल्म के बारे में ट्विट करते हुए लिखा था ‘फटा पोस्टर निकला हीरो और हीरोईन अजरुन कपूर और परिणिती चोपड़ा।’ 15 मार्च को को जब विजेता फोन पर बात करते हुए बहुत रोई थी, दुआएं और पार्थनाएं कर रही थी तो मोना कपूर का मन भारी हो गया था। 16 मार्च को अपने एक अन्य ट्विट पर उन्होंने लिखा था.. ‘अब अगर किसी ने पूछा ना कि मैं कैसी हूं तो मैं ब्लॉक कर दूंगी। आप सभी जानते हैं कि मैं अस्पताल में हूं और मुझे मल्टीपल आर्गन कैंसर है, जो तीसरी स्टेज पर है.कृपया मेरे लिए दुआ करें।’..और इसके बाद उन्होंने मिताली का एक ट्विट रि-ट्विट किया था..। आज वह हमारे बीच नहीं है.एक अधूरी इच्छा छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गई हैं. अर्जुन कपूर    और अंशुला कपूर को वह हमेशा खुश देखना चाहती थीं। जिंदगी के सच का सामना करते हुए उन्होंने खुद को जुझारू महिला के रूप में पेश किया ।

19साल की उम्र में विवाह

मोना कपूर जब 19 साल की थी तो उनका विवाह  अपने से10 साल बड़े बोनी कपूर से हुआ। यह एक अरैंज मैरिज थी और दोनों ही इस विवाह से खुश थे।  अर्जुन कपूर   और अंशुला के जन्म के साथ सब कुछ ठीक चल रहा था। एक तरफ मोना ने परिवार को एक कड़ी के रूप में संभाला तो दूसरी तरफ बोनी कपूर बॉलीवुड में अच्छे फिल्म निर्मा ताके रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। लेकिन जिंदगी के इस शानदार सफर में मोना और बोनी कपूर के बीच श्रीदेवी के आने से दोनों के एक दशक से भी अधिक लंबे वैवाहिक जीवन में दरार आ गई।  मोना की जिंदगी में यह एक बड़े सदमे की तरह था, एक तरफ उनके बच्चे स्कूल में जिंदगी को बेहतर मार्ग पर चलने का पाठ सीख रहे थे इधर मोना और बोनी कपूर के वैवाहिक जीवन में अलगाव का  दर्द आ गया।

अपनी पहचान बनाई

मोना ने  2007 में   एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कहा था. ‘वह समय मेरे और मेरे बच्चों के लिए बहुत मुश्किल और दर्द भरा था लेकिन हमने सच का मजबूती से सामना किया।’  मोना अलगाव के जिस दौर से गुजरी थीं, वह किसी को भी तोड़ सकता है। मोना के परिवार ने ऐसे समय में उनके आत्मविश्वास बढ़ाया । मोना के पापा, मां और बहन ने  उन्हें हिम्मत दी और कहा कि जिंदगी के इस कड़वे सच का सामना करो और एक बहादुर महिला की तरह जिंदगी को जियो। फिल्म उद्योग जगत की विवाहित महिलाएं ऐसे समय में मोना को सलाह दे रही थीं कि  तुम अपना वजन क्यों नहीं घटाती ? तुम स्पा क्यों नहीं ज्वाइन कर लेती? लेकिन मोना ने ऐसे समय में अपनी खुद की पहचान बनाने की सोची, और अपने दिल की बात अपने पिता से साझा की। मोना कपूर जिंदगी के प्रति सकरात्मक सोच रखती थी। उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर प्रोडक्शन हाउस खोला और युग, विलायती बाबू, हेरा फेरी और कैसा ये कानून जैसे सीरियल बनाए। मुंबई में फ्यूचर स्टूडियो का निर्माण और 12 फिल्म सेट का निर्माण मोना कपूर के विजन का ही कमाल था।

बच्चों को हमेशा खुश देखना चाहती थीं

बोनी कपूर से मोना का अलगाव हो जाने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को कभी ये नहीं कहा कि वे अपने पिता से ना मिला करें, वह जानती थीं कि उनके बच्चे जितना उनसे प्यार करते हैं, वैसा ही लगाव पिता लिए भी है। वह अपने बच्चों को हमेशा खुश देखना चाहती थीं और वह कहतीं भी थीं. ‘कि मैं नहीं जानती कि एक पुरुष किस तरह से सोचता है, लेकिन इतना जरूर महसूस करती थी कि बच्चों को पिता से दूर रखना सही नहीं है।’ मोना जिंदगी को रोलरकॉस्टर की तरह मानती थी ।

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम कुछ अजीब है, वो कल भी पास पास थी वो आज भी करीब है. यह वह गीत है जो मोना कपूर जी को बेहद पसंद था और जिसका जिक्र उन्होंने ट्विटर पर अपनी एक पोस्ट में किया था। आज हमारे बीच मोना कपूर जी नहीं है लेकिन उन्होंने दुनिया को बताया कि जिंदगी को किस जिंदादिली से जिया जा सकता है।

‘क्या ईश्वर अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है? वह सभी अच्चे लोगों को अपने पास बुला रहा है। मोना कपूर के निधन की खबर सुनकर बहुत दु:ख हुआ, वह बहुत हेल्पफुल और दयालु महिला थी।’
 -मोना कपूर के निधन की खबर सनुनने के बाद ट्विटर पर अनुपमखेर.

-राजेश यादव

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