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क्या भारतीय मूल के तारिक अनवर का जादू ऑस्कर में चलेगा


अब से कुछ देर बाद भारत के लोग क्रिकेट की खुमारी में डूब जाएंगे, भारत जीते यह उम्मीद मैं भी कर रहा हूं । लेकिन ठीक इसी समय ऑस्कर अवार्ड की घोषणा भी होने वाली है ऐसे में फिलहाल मैं भारतीय मूल के उस इंसान के लिए दुआ करूंगा जिसने अपने फिल्मों में अपने सफर की शुरूआत एक प्रोडक्षन हाउस में ड्राइवर के रूप में की थी।
जी हां मैं तारिक अनवर साहब की बात कर रहा हूं जिनके पिता ने नीचा नगर नामक एक हिन्दी फिल्म में काम किया था और इसे 1946में कांश फिल्म महोत्सव में सम्मान भी मिला था। द किंग स्पीच के लिए बेहतरीन संपादन का अवार्ड अगर तारिक जीतते हैं तो भारतीय मूल के ब्रितानी फिल्म संपादक के लिए यह एक बड़ी सफलता होगी। होप जो काम अमेरिकन ब्यूटी से न संभव हुआ वह किंग स्पीच से संभव हो जाए।

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पहले वह एक दयालु किसान था लेकिन कुछ बातों ने उसे औरों से अलग बनाती थी। जैसे.

1949 : उसने सेना को ज्वॉइन किया

1958 में उसने 3000 मीटर में स्टेपलचेस का नया नेशनल रिकार्ड बनाया।

1958 से1964 तक लगातार सात साल वह नेशनल चैंपियन बना।

लेकिन एक दिन वह सिस्टम से ऐसा नाराज हुआ की  बागी  बन गया। चंबल के इस भागी पान सिंह तोमर की कहानी को बॉक्स ऑफिस पर तिग्मांशु धूलिया लेकर आ रहे हैं। फिल्म का एक चर्चित संवाद आजकल चर्चा में हैं.

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जिंदगी की किताब की विशेष न्यूज। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक वेंकटरमन रामाकृष्णनन, थॉमस स्टेट्जि और इजरायल की यदा योनेथ को संयुक्त रुप से रसानयन के श्रेत्र में की गई खोज राइबोसोम की संरचना के अध्ययन और खोज के लिए २००९ का नोबल प्राइज देने का ऐलान किया है।
द रॉयल स्वीडिस एकेडमी ऑफ साइंस ने कहा है कि राइबोसोम डीएनए कोड को जीवन के रुप में स्थानांनतरण करते है।
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