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नो प्राब्लम : नो कॉमेडी, ढेर सारी प्रॉब्लम




**********************निर्माता : अनिल कपूर, रजत रवैल, डॉ. बी. के . मोदी
निर्देशक : अनीस बज्मी
कलाकार : अनील कपूर, संजय दत्त, अक्षय कुमार , सुष्मिता सेन, कंगना,
संगीत : प्रीतम
बैनर : इरोज इंटरनेशनल, अनिल कपूर फिल्मस कंपनी, स्पाइस इंफोटेनमेंट
सेंसर सर्टिफिकेट : यू /ए
रेटिंग : २

मैं आश्चर्य में हूं कि सिंह इज किंग और वेलकम जैसी फिल्म बनाने के बाद अनीस बज्मी नो प्राब्लम जैसी दोयम दर्जे की कॉमेडी फिल्म के साथ दर्शको से रूबरू हो रहे हैं। फिल्म शुक्रवार को रीलिज हुई है जिसमें कॉमेडी के नाम पर कई सारे एर्रर दिखलाई पड़ते है और बेहतरीन कॉमेडी सिरे से गायब नजर आती है। फिल्म में वह फन और मस्ती नहीं है जो दर्शको को गुदगुदाए। सिनेमाहॉल में बैठे दर्शक के चेहरे पर दो इंच की मुस्कान लाने के लिए सेंसलेस कॉमेडी बनाने के लिए हर संभव उपाय करने का प्रयास किया है, सिवाय बेहतरीन पंचलाइन युक्त संवाद के।


अनीस के निर्देशन में बनीं सिंह इज किंग और वेलकम हिट रही थी क्योंकि उसमें बेहतरीन संवाद और गीतों के साथ कलाकारों का जोरदार अभिनय था जबकि नो प्राब्लम में संवाद, और गीत संगीत दोनों ही कमजोर है। जहां तक कलाकारों के अभिनय की बात है तो अनिल कपूर और सुष्मिता सेन के अलावा अन्य कलाकार टाइप्ड अभिनय किया है। अगर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रहती है तो इसके लिए केवल एक इंसान को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और वह खुद अनीस बज्मी है। फिल्म में बिकनी गर्ल, ग्लैमरस कारे और विदेसी लोकशन का खूब इस्तेमॉल किया गया है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि फिल्म बनाने के लिए भारत में तो अब अच्छे स्थान बचे ही नहीं है। ना जाने क्यों हमाने निर्माता निर्देशक भारत के आम दर्शकों के हिसाब से क्यों नहीं सोचते है? खैर इन सब बातों के अलावा दिमाग घर पर रखकर इस फिल्म को देखने की हिम्मत आप उठा सकते हैं। कहानी में कुछ नया पन नहीं है और फिल्म में बैंक के खजाने की लूट पाट के साथ हॉस्य को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
फिल्म में यस (संजय दत्त) और राज अंबानी (अक्षय खन्ना) बचपन के दोस्त है और दोनों ही बदमाश है, वे झंडूलाल (परेश रावल) के बैंक से पैसा लूटकर भाग जाते हैं। झंडूलाल अपने आप को निर्दोष साबित करना चाहता है और यस और राज को पकड़वाने के लिए प्रयास करता है। फिल्म में अजरुन सिंह (अनिल कपूर) एक ऐसे पुलिस ऑफिसर के रूप मे नजर आए है जो करता कुछ है और होता कुछ और ही है ,वहीं काजल (सुष्मिता सेन) उनकी ऐसी बीवी है जो स्लिप पर्सनालिटी की शिकार है और उसे कभी भी गुस्सा आ जाता है। इस बीच फिल्म में राज को संजना कंगना से प्यार हो जाता है, दोनों की मंगनी के दिन झंडूलाल पहुंच जाता है और इस बीच यस और राज उससे वादा करते हैं कि वे उसका पैसा लौटा देंगे। इसके लिए वह एक बड़ी चोरी करते है जिसमें करोड़ो के हीरे चुरा लेते है, लेकिन एक गैंग भी इन हीरों के पीछे पड़ी रहती है। फिल्म में इन सब बातों के साथ एक मर्डर भी हो जाता है? हीरा कहां है? के टिवस्ट के साथ फिल्म कई उतार चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है। इस फिल्म में आपको मानव पात्रों के साथ एक गोरिल्ला पात्र भी दिखेगा।


निर्देशक ने फिल्म की रफ्तार तेज रखी है, एक दो गीतों के अलावा फिल्म का अन्य कोई गीत प्रभाव छोड़ने में सक्षम नजर नहीं आता है। संगीतकार प्रीतम उम्मदी पर खरे नहीं उतरे है और अच्दे संगीत के अभाव पूरी फिल्म पर हावी नजर आता है। हॉस्य फिल्मों की सफलता में बेहतरीन संवादो का सबसे ज्यादा योगदान होता है और नो प्रॉब्लम की सबसे बड़ी कमजोरी इसके संवाद ही है। कुछ सीन जरूर हॉस्य पैदा करते है लेकिन संवाद बेहद कमजोर है, कम से कम यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनीस से बेहतर की उम्मीद थी लेकिन वे यहां बेहद निराश करते है। परेश रावल आजकल एक जैसे रोल में नजर आ रहे है और उनके अभिनय में यहां भी कुछ नया नहीं हैं, नीतू चंद्रा ने ग्लैमर के तड़के के साथ कुछ फाइट सीन भी किए निर्देशक हॉस्य और मारधाड़ को जोड़कर फिल्म की पटकथा रचने में भटकाव का शिकार भी हुआ है और उसका प्रभाव पूरी फिल्म और कलाकारों के अभिनय पर भी दिखता है। पॉपकार्न और फॉस्ट फूड की जनरेशन ग्लैमर की चमक के साथ हॉस्य का घालमेल पसंद करती है , अब देखने वाली बात यह होगी की अनीस बज्मी के नो प्रॉब्लम वाले तड़के के साथ वह किस तरह का रिस्पांस देती है।

राजेश यादव

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