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‘मिलेंगे-मिलेंगे’ : ‘जब वी मेट’ वाला जादू नहीं

फिल्म समीक्षा : मिलेंगे-मिलेंगे
रेटिंग : * *
कास्ट- शाहिद कपूर, करीना कपूर, आरती छाबड़िया, दिलनाज पाल

निर्देशक- सतीश कौशिक
निर्माता- बोनी कपूर, एसके फिल्म इंटरप्राइजेस म्यूजिक डायरेक्टर- हिमेश रेशमिया।


लंबे समय बाद करीना कपूर और शाहिद कपूर के अभिनय से सजी फिल्म ‘मिलेंगे-मिलेंगे’ रिलीज हुई। निर्देशक सतीश कौशिक की इस फिल्म में किस्मत का कनेक्शन खूब जोड़ा गया है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर हिट होने के लिए जिस पटकथा और नएपन की जरूरत होती है वैसा कुछ भी इस फिल्म में नहीं है।



बेदम पटकथा के साथ ही शाहिद और करीना के औसत अभिनय के चलते फिल्म में ‘जब वी मेट’ वाला जादू नहीं दिखता है। फिल्म में हिमेश रेशमिया का संगीत भी निराश ही करता है।



प्रिया (करीना कपूर) एक ऐसी लड़की है जो प्यार में विश्वास करती है। उसे एक टैरो कार्ड रीडर बताती है कि उसका मिस्टर राइट बैंकाक में ही मिलेगा जो उसका जीवन साथी बनेगा। वह अपने सपनों के राजकुमार से मिलने की आस में बैंकॉक जाती है। बैंकाक में प्रिया की मुलाकात इम्मी (शाहिद कपूर) से होती है जो शराब, सिगरेट और झूठ बोलने में माहिर होता है। ये तीनों बातें ऐसी हैं जिनको प्रिया पसंद नहीं करती लेकिन इम्मी को प्रिया की डायरी मिल जाती है। इसके बाद वह प्रिया के सामने अपने व्यवहार में इन बातों को सामने नहीं लाता।



प्रिया को इम्मी में अपना मिस्टर राइट नजर आता है और वह उससे प्यार करने लगती है। लेकिन उसे बहुत जल्द उसे असलियत का पता चल जाता है। वह जान जाती है कि उसे जिन चीजों से नफरत है इम्मी उनका आदि है। सच्चई सामने आने पर इम्मी अपनी प्रेमिका प्रिया को समझाने का प्रयास करता है कि वह उससे सच्ची मोहब्बत करता है और शराब, सिगरेट और झूठ बोलने की आदत छोड़ देगा।
प्रिया कहती है अब उन दोनों को किस्मत ही मिला सकती है और वह उससे दूर चली जाती है और बाद में एक किताब पर प्रिया का नाम और एक नोट पर उसका फोन नंबर मिलने से ही इस मोहब्बत के मिलन की शर्त जुड़ती है। फिल्म में कुछ नए मोड़ के साथ नायक और नायिका की किस्मत अंजाम तक पहुंचती है।



फिल्म दर्शकों को बांध पाने में सफल नजर नहीं आती और दर्शक को आगे की कहानी का पहले से ही अंदाजा हो जाता है। फिल्म पटकथा लेखन और संपादन के स्तर पर कमजोर है। एक दो गाने ही ठीक-ठाक हैं लेकिन शाहिद और करीना की पिछली फिल्मों पर नजर डालें तो यह फिल्म निराश ही करती है। हां शाहिद ने फिल्म में जो लड़की का रूप धारण किया है वह जरूर कुछ मनोरंजक बन पड़ा है।
निर्देशक सतीश कौशिक भी अपनी इस फिल्म में वह प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जो उनकी फिल्मों में हुआ करता है।


कुल मिलाकर यह फिल्म करीना और शाहिद के प्रशंसकों को निराश करने वाली ही है। खासतौर पर ‘जब वी मेट’ के बाद शाहिद-करीना की जोड़ी का दर्शकों को विशेष रूप से ेइंतजार था। लेकिन फिल्म को दर्शकों का कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। प्यार में किस्मत का खेल भले चलता हो पर बॉक्स ऑफिस पर हिट होने के लिए दमदार स्टोरी लाइन का होना बेहद जरूरी है जो ‘मिलेंगे-मिलेंगे’ में नदारद है। -राजेश यादव

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