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बाबू मुशाय! जिंदगी के सफर में॥कभी धूप कभी छांव



2४ साल के उस लड़के को उसकी किस्मत मुंबई लाई थी, फिर रोमांस का एक जादू चला और जो कभी जतिन था राजेश खन्ना के नाम से बॉलीवुड में छा गया। आखिरी खत से फिल्मी जीवन शुरु हुआ और कुछ सालों में ही राजेश के अभिनय और रूमानी अंदाज ने उनकों ऐसा कलाकार बना दिया जिसकी जिसके आगे स्टॉर शब्द भी छोटा लगने लगा और इस तरह से बॉलीवुड को उसका पहला सुपर स्टॉर मिल गया। दरअसल राजेश के बचपन का नाम जतिन था और एक टैलंट शो का विजेता बनने के बाद उनकों बॉलीवुड में अपनी किस्मत अजमानें का मौका मिला था।

२९ दिसबंर १९४२ को जन्में राजेश खन्ना ने मात्र २४ साल की उम्र में बॉलीवुड में प्रवेश किया था। सिलसिला आखिरी खत से शुरु हुआ और राज, बहारों के सपने, अराधना, दो रास्ते , कटी पंतग और सफर की फिल्मों की सफलता का आलम यह था कि बॉलीवुड में उनकी एक अलग पहचान बन गई। १९६९ से १९७२ के बीच राजेश खन्ना ने १५ सिल्वर जुबली फिल्में देकर एक ऐसा रिकार्ड बनाया जिसे आज तक कोई छू भी नहीं पाया है। राजेश को सुपर सितारा कहा जाने लगा, कहा जाता है कि लड़कियां उनके सम्मोहन में कुछ इस कदर दिवानी थी कि खून से लिखे खत भेजती थी और उनकीं कारों को चूमने में भी उनकी प्रशंसकों को कोई झिझक नहीं होती थी।

आन्नद, सच्च झूठा, अमर प्रेम जैसी फिल्मों में उनका बेहतरीन अभिनय अपने उफान पर था और अपनी संवाद अदायगी, बोलने का अलहदा अंदाज लोंगो को सबसे अलग और सबसे जुदा लगे। राजेश खन्ना का फिल्मी जीवन एक पहली की तरह है उनकों बेहद कम समय में एक ऐसी सफलता मिली जिसकी उस वक्त कोई कल्पना नहीं कर सकता था लेकिन सफलता के इस माउंट एवरेस्ट पर इस सुपर सितारे ने बहुत कम साल ही राज किया और अमिताभ बच्चन के आगाज होने के साथ ही उनका क्रेज धीरे धीरे कम होता गया। फिल्मी जीवन से अलग राजनीति में भी उन्होंने धमाकेदार प्रवेश किया था और पहले भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को कड़ी टक्कर दी और बाद में १९९१ से १९९६ के दौरान सांसद भी रहे।फिल्म अवतार से एक बार लगा कि काका वापसी करने जा रहे है लेकिन इस भावनात्मक फिल्म के बाद वे कोई बड़ी फिल्म नहीं दे सकें।

प्यार की किताब रूपी जिंदगी में राजेश को अंजू महेन्द्रू से खासा लगाव था लेकिन कुछ बातों पर अनबन के चलते यह दोस्ती खत्म सी हो गई। लेकिन बॉबी फिल्म से हिट हुई डिंपल कपाड़िया के दिल पर भी काका राज करते थे और डिंपल की खूबसूरती के कायल काका ने विवाह किया। दोनों की जिंदगी में दो खूबसूरत बेटिंया भी आई। समय के साथ काका का स्टॉरडम कम होता गया और बाद में डिंपल के साथ भी रिस्तों में वह बात नहीं रही और दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद काका की जिंदगी में उनकी खास और सबसे राजदार दोस्त बनीं टीना मुनीम, लेकिन इस दोस्ती में भी ठहराव नहीं था। दरअसल राजेश खन्ना की जिंदगी में ऐसा बहुत कुछ है जिसकी कल्पना आप आदमी नहीं कर सकता शायद इसी लिए तो कभी कहा जाता था ऊपर आका नीचे काका।
RAJESH YADAV

टिप्पणियां

Udan Tashtari ने कहा…
काफी जानकारी मिली काका की.


यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

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वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

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