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‘एसिड फैक्टरी’: मेमोरी का खेल


निर्देशक : सुपर्ण वर्मा
निर्माता : संजय गुप्ता
कलाकार : फरदीन खान,दिया मिर्जा, गुलशन, इरफान खान , मनोज वाजपेयी, आफताब शिवदासनी, , डैनी गुलशन ग्रोवर आदि।संगीत : बप्पी लाहिरी,समीर टंडन, गौरव दासगुप्ता
बैनर :व्हाइट फीदर ,मुंबई मंत्र


थ्रिलर ,सस्पेंस, और जोखिम पंसद करने वाले दर्शकों को ‘एसिड फैक्टरी’ का टेस्ट पसंद आ सकता है। लेकिन बेहतर संगीत, और बॉलीवुड स्टाइल का ग्लैमर देखने वालों को निराशा हो सकती है। निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने थ्रिलर और रोमांच से जुड़ा जो मेमोरी का जो खेल-खेला है उसमें अति नाटकीयता से बनती बात बिगड़ती लगती है। फिल्म का पहला बेहतर है लेकिन वह रफ्तार और रिद्म फिल्म के दूसरे भाग में नजर नहीं आती।


जहां तक फिल्म की कहानी की बात है तो इसमें फ्लैश बैक का इस्तेमॉल कई बार किया गया है। एसिड फैक्टरी में बंद ६ लोग एक गैस सूंघने के कारण अपनी मेमोरी खो बैटते है। फैक्टरी के अंदर बार बार जुर्म की दुनियां से जुड़े इरफान खान का फोन आता है जो समय समय पर अपने कुछ निर्देश अपने लोगों को देता है। उसकी बातों के आधार पर अंदर बंद लोग अपनी अपनी पहचान जानते है जिसके बाद शुरु होता है शह और मात का खेल। हर मोहरा अपनी अपनी जिंदगी बचाने के लिए समय की चाल के अनुसार अपने फैसले करता है। फरदीन, आफताब इस खेल में सफल होते है, वहीं दिया मिर्जा, इरफान खान और मनोज वाजपेयी का खेल बिगड़ जाता है।


फिल्म में इरफान खान और फरदीन का अभिनय ठीक ठाक है, वहीं बाकी कलाकारों ने औसत काम किया है। दिया मिर्जा एक अलग तरह के रोल में है लेकिन इस फिल्म से उनके कॅरियर में कोई बड़ा बदलाव आएगा कहा नहीं जा सकता। गीत संगीत के मामलें में फिल्म निराश करती है। कहानी की शुरुआत तो सहीं होती है लेकिन बाद में बिखराव हो जाता है जो फिल्म का कमजोर पक्ष है। लेकिन कम बजट में बनीं इस फिल्म में कई अच्छी बातें भी है और कुछ हटकर करने का प्रयास निर्देशक ने किया है। थ्रिलर, सस्पेंस देखना अगर आपकी पंसद में शामिल है तो फिल्म को आप अपनी रिस्क पर देख सकतें है।

RAJESHYADAV

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